रायपुर। तहफ्फुज-ए-नमुस-ए-रिसालत एक्शन ट्रस्ट (टीएनआरएटी) छत्तीसगढ़ प्रदेश ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में 10 सूत्रीय संवैधानिक मांगें पेश की हैं। संगठन ने कहा है कि यूसीसी संविधान के अनुच्छेद 44 के नीति-निर्देशक सिद्धांत से जुड़ा विषय है, लेकिन किसी भी संबंधित कानून का निर्माण और क्रियान्वयन मौलिक अधिकारों तथा अन्य संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए।
टीएनआरएटी ने अपनी मांगों में कहा है कि यूसीसी से जुड़े किसी भी कानून या नीति में अनुच्छेद 44 के साथ-साथ अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 26 और 29 में निहित अधिकारों और सीमाओं का पूरा ध्यान रखा जाए। मुस्लिम नागरिकों के धार्मिक आचरण या धर्म से जुड़े व्यक्तिगत मामलों को प्रभावित करने वाले प्रावधानों की अनुच्छेद 25 के संदर्भ में विशेष संवैधानिक समीक्षा हो। मुस्लिम धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर अनुच्छेद 26 का संरक्षण भी ध्यान में रखा जाए।
संगठन ने यह भी मांग की है कि यूसीसी की प्रत्येक धारा को अनुच्छेद 14 के तहत समानता और विधि के समान संरक्षण की कसौटी पर परखा जाए। अनुच्छेद 15 और 21 के संरक्षणों का पूरा ध्यान रखते हुए धर्म या अन्य आधारों पर भेदभाव न हो तथा विवाह, परिवार और व्यक्तिगत मामलों में व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
मुस्लिम विवाह, निकाह, मेहर और तलाक से जुड़े प्रावधानों के प्रभाव को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया जाए तथा मुस्लिम विधि विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों से औपचारिक परामर्श किया जाए। उत्तराधिकार, वसीयत और संपत्ति संबंधी अधिकारों पर कानूनी, सामाजिक, आर्थिक व पारिवारिक प्रभाव का स्वतंत्र विशेषज्ञ अध्ययन कराया जाए और निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं। पहले से वैध निकाह, निकाहनामे, मेहर, वसीयत और अन्य दस्तावेजों से उत्पन्न अधिकारों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट संक्रमणकालीन प्रावधान किए जाएं।
टीएनआरएटी ने जोर दिया है कि मुस्लिम समाज से संबंधित किसी भी महत्वपूर्ण प्रावधान को अंतिम रूप देने से पहले उलेमा, मुस्लिम पर्सनल लॉ विशेषज्ञों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, महिलाओं के प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से औपचारिक व सार्थक परामर्श किया जाए। लिखित सुझाव और आपत्तियां देने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। प्रस्तावित यूसीसी का पूरा मसौदा सार्वजनिक किए बिना और व्यापक जनपरामर्श, विशेषज्ञ समीक्षा तथा संवैधानिक परीक्षण पूरा किए बिना कोई कानून जल्दबाजी में लागू न किया जाए।
संगठन ने कहा है कि वह संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था का सम्मान करता है। उसकी मांगें किसी कानून का मात्र विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रक्रिया, पारदर्शिता, व्यापक जनपरामर्श और मुस्लिम समाज से सार्थक संवाद सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हैं। टीएनआरएटी की स्पष्ट मांग है कि अनुच्छेद 44 के तहत यूसीसी की दिशा में आगे बढ़ते समय मौलिक अधिकारों और संबंधित संवैधानिक प्रावधानों का पूर्ण सम्मान किया जाए तथा मुस्लिम समाज से संबंधित विषयों पर उसके प्रतिनिधियों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
(जारीकर्ता: तहफ्फुज-ए-नमुस-ए-रिसालत एक्शन ट्रस्ट, छत्तीसगढ़ प्रदेश)

