आबकारी अधिकारियों का खंडन: वसूली के आरोप झूठे, कोई लेन-देन नहीं

Khabar 24
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कबीरधाम, छत्तीसगढ़ | 15 जून 2026

छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद के जिलाध्यक्ष कामू बैगा द्वारा आबकारी विभाग के अधिकारियों SI रायजादा और SI गीता पर लगाए गए भ्रष्टाचार और वसूली के आरोपों पर दोनों अधिकारियों ने सख्त खंडन किया है।


SI रायजादा ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए आरोपों को पूरी तरह झूठा और बेबुनियाद बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि SI गीता उस दिन नगर पंचायत पिपरिया में समाधान शिविर (सुशासन तिहार) में थीं और संबंधित प्रकरण के दौरान घटनास्थल पर उपस्थित नहीं थीं।


अधिकारियों का पक्ष

SI रायजादा ने बताया कि संबंधित मामले में आरोपी कस्टडी से नहीं, गिरफ्तारी से पूर्व फरार हो गया था! उन्होंने तुरंत संबंधित थाना क्षेत्र और अपने उच्च अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद आबकारी अधिनियम की धारा 34/2 के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया।


उन्होंने जोर देकर कहा कि पैसे की कोई मांग या लेन-देन नहीं हुआ। SI रायजादा ने कहा, “पैसों की मांग या अवैध वसूली जैसा कुछ भी नहीं हुआ। यह पूरी तरह झूठा आरोप है।”


संगठन के आरोपों का खंडन


कामू बैगा ने ज्ञापन में आरोप लगाया था कि आबकारी अधिकारी समरत बैगा, शहरु बैगा, समेत कुछ बैगा समाज के लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भेज रहे हैं और उनसे अवैध वसूली कर रहे हैं।


SI रायजादा ने इन सभी आरोपों को मनगढ़ंत करार दिया और कहा कि विभाग अपनी ड्यूटी का निर्वहन कर रहा है। महुआ लाहान या अवैध शराब की तस्करी/उत्पादन जैसे मामलों में सख्ती बरती जा रही है, जो राज्य सरकार की नीति के अनुरूप है।


SI गीता ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए उन्हें पूरी तरह झूठा और बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि यह उनका प्रकरण नहीं है तथा वह घटनास्थल पर उपस्थित भी नहीं थीं।​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​



मामला क्या था?


11 जून 2026 को कामू बैगा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। प्रतिनिधिमंडल में कमल धुर्वे (महासचिव), सहित कई प्रमुख सदस्य शामिल थे। ज्ञापन में SI रायजादा और SI गीता के तत्काल निलंबन की मांग की गई थी, अन्यथा उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई थी।



अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच करेगा और सच्चाई सामने आएगी।