झलमला में विश्व मलेरिया दिवस पर मितानिन प्रशिक्षण, 2027 उन्मूलन लक्ष्य को तेजी देने का आह्वान
विकासखण्ड बोडला के दूरस्थ वनांचल ग्राम झलमला में 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस पर एक महत्वपूर्ण मितानिन प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. पुरूषोत्तम सिंह राजपूत व विकासखण्ड कार्यक्रम प्रबंधक रूपेश साहू के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण में जिला स्तर से जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सतीश चन्द्रवंशी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती अनुपमा तिवारी, जिला व्हीबीडी सलाहकार जयंत मेश्राम उपस्थित हुए। कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्ज्वलन से की गई। यह आयोजन मलेरिया उन्मूलन 2027 में तेजी लाने हेतु किया गया।
प्रशिक्षण में मलेरिया प्रभावित उप स्वास्थ्य केंद्र झलमला, शीतलपानी, रोल, समनापुर की मितानिन प्रशिक्षक, मितानिन व सेक्टर चिल्फी की आरएचओ पुरुष/महिला उपस्थित थे। मितानिनों को नियमित गृह भ्रमण कर बुखार के मरीज की मलेरिया जांच करने तथा प्रकार अनुसार पूर्ण उपचार देने के निर्देश दिए गए।
प्रशिक्षण में मलेरिया मरीज का नियमित फॉलोअप करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। मलेरिया सकारात्मक केस के आसपास कॉन्टैक्ट सर्वे व सूचना तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया गया। नियमित मच्छरदानी मॉनिटरिंग व लार्वा स्रोत रिडक्शन करने हेतु कहा गया। मच्छर के जीवन चक्र को प्रभावित करने हेतु लार्वा स्रोत व गड्ढा भरान करने के लिए निर्देश दिए गए।
0-6 साल के बच्चे व गर्भवती महिलाओं में मलेरिया सकारात्मक पाए जाने पर निगरानी में रखने की बात कही गई। पूर्ण दवाई खाने के बाद रैपर (खाली पत्ता) को संबंधित उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर जमा करने को कहा गया।
विकासखण्ड में मलेरिया दिवस के तहत मलेरिया प्रभावित ग्रामों में बैगा गुनिया सम्मेलन व सामुदायिक जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सतीश चन्द्रवंशी द्वारा बताया गया कि शून्य मलेरिया केस हेतु अभी से रणनीति बनाकर काम करने की जरूरत है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती अनुपमा तिवारी ने बताया कि बरसात पूर्व मलेरिया प्रभावित ग्रामों में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जाएगा।
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. पुरूषोत्तम सिंह राजपूत ने कहा कि सेक्टर चिल्फी व रेंगाखार में मलेरिया केस कम करना हमारी प्राथमिकता है। मलेरिया के लक्षण जैसे बुखार, सिर दर्द, उल्टी, बुखार में उतार-चढ़ाव, एक दिन-दो दिन के अंतराल में बुखार आना आदि हैं। लक्षण पाए जाने पर त्वरित जांच व पूर्ण उपचार दिया जाना है।
वनांचल क्षेत्र में झाड़-फूंक और झोला छाप से इलाज कराने से बचने का आग्रह किया गया।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु सीएचसी झलमला प्रभारी, सेक्टर सुपरवाइजर, मलेरिया सुपरवाइजर, आरएचओ पुरुष/महिला, मितानिन प्रशिक्षक व मितानिनों का सराहनीय योगदान रहा।


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