दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल संयुक्त अभियानों में तैनात रहने के बाद क्रोएशिया पहुंच गया है। पोत शनिवार को एड्रियाटिक सागर तट पर स्थित स्प्लिट बंदरगाह में मरम्मत और रखरखाव के लिए लंगर डाला।घटना का विवरणयूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड (CVN-78) पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे युद्ध के समर्थन में लाल सागर में तैनात था। 12 मार्च 2026 को पोत के मुख्य लॉन्ड्री रूम (धुलाई कक्ष) में आग लग गई। इस घटना में तीन नाविक घायल हो गए।आग को काबू में लाने में कई घंटे लग गए। उस समय एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि लगभग 200 नाविकों को धुएं के कारण इलाज की जरूरत पड़ी। आग ने पोत के करीब 100 सोने के बर्थ (बिस्तरों) को प्रभावित कर दिया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, आग बुझाने में 30 घंटे से अधिक समय लगा और इससे 600 से ज्यादा नाविकों को अपने बिस्तर खोने पड़े।
मरम्मत और आगे की योजनाआग की घटना के बाद पोत को शुरू में ग्रीस के सौदा बे (Souda Bay) में मरम्मत के लिए भेजा गया था। अब तकनीकी समस्याओं और स्थानीय विरोध प्रदर्शनों के कारण इसे क्रोएशिया के स्प्लिट (Split) बंदरगाह में स्थानांतरित कर दिया गया है। यहां पोत की पूरी जांच, मरम्मत और जरूरी सामान की पूर्ति की जाएगी।अमेरिकी नौसेना के अनुसार, पोत अभी भी पूरी तरह से मिशन-क्षम (fully mission capable) है और इसकी प्रणोदन प्रणाली (propulsion plant) को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।यह घटना लंबे समय से चले आ रहे तैनाती मिशन के दौरान हुई है, जिसमें नाविकों को थकान और रखरखाव संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्रोत: विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स (मार्च 2026)



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